bikhri zulfon ne sikhai mausamon ko shairi jhukti aankhon ne bataya mai-kashi kya chiz hai
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जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे
Mohammad Rafi Sauda
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बुझे लबों पे है बोसों की राख बिखरी हुई मैं इस बहार में ये राख भी उड़ा दूँगा
Saqi Faruqi
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रेशमी ज़ुल्फ़ों के तुम अपनी इशारे समझो आज रंगीन करें रात क़रीब आ जाओ
Sohaib Alvi
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मता-ए-जान अगर तुम मुझे इजाज़त दो तो इक गुलाब लगा दूँ तुम्हारी ज़ुल्फ़ों में
Shajar Abbas
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और भी दुनिया में मंज़र ख़ूब-सूरत हैं मगर तेरी ज़ुल्फ़ों झटकने से सुहाना कुछ नहीं
Alankrat Srivastava
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ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र-दर-सफ़र आख़िरी साँस तक बे-क़रार आदमी
Nida Fazli
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उस को रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न था सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
Nida Fazli
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गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया
Nida Fazli
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इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा
Nida Fazli
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नक़्शा उठा के और कोई शहर देखिए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई
Nida Fazli
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