बुझे लबों पे है बोसों की राख बिखरी हुई मैं इस बहार में ये राख भी उड़ा दूँगा
Related Sher
उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
106 likes
ये तेरे ख़त ये तेरी ख़ुशबू ये तेरे ख़्वाब-ओ-ख़याल मता-ए-जाँ हैं तेरे कौल और क़सम की तरह गुज़िश्ता साल मैं ने इन्हें गिनकर रक्खा था किसी ग़रीब की जोड़ी हुई रक़म की तरह
Jaun Elia
74 likes
कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
91 likes
इक दूसरे को छोड़ के जाने की बात है अपनी नहीं ये सारे ज़माने की बात है बस यूँँ समझ लो उन सेे मेरा कद बलंद है जिन के लबों पे मुझ को गिराने की बात है
Kashif Sayyed
44 likes
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
149 likes
More from Saqi Faruqi
ये क्या तिलिस्म है क्यूँँ रात भर सिसकता हूँ वो कौन है जो दियों में जला रहा है मुझे
Saqi Faruqi
7 likes
दुनिया पे अपने इल्म की परछाइयाँ न डाल ऐ रौशनी-फ़रोश अँधेरा न कर अभी
Saqi Faruqi
9 likes
ये ख़ामुशी का ज़हर नसों में उतर न जाए आवाज़ की शिकस्त गवारा न कर अभी
Saqi Faruqi
8 likes
मुझ में सात समुंदर शोर मचाते हैं एक ख़याल ने दहशत फैला रक्खी है
Saqi Faruqi
10 likes
मुझ को मिरी शिकस्त की दोहरी सज़ा मिली तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी दुनिया से जा मिली
Saqi Faruqi
10 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Saqi Faruqi.
Similar Moods
More moods that pair well with Saqi Faruqi's sher.







