बुज़ुर्ग जा रहे हैं दुनिया छोड़ रफ़्ता रफ़्ता अब हमें भी काँधे के लिए पुकारता है गाँव देख
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
179 likes
More from Subhash Ehsaas
है 'सुभाष एहसास' की सोहबत में दुनिया कुछ अकड़ में है मगर झूठी नहीं है
Subhash Ehsaas
0 likes
ये पता चला हमें तेरे इंतिज़ार में थोड़ी देर होने में कितनी देर लगती है
Subhash Ehsaas
0 likes
राएगानी के अगर मानी समझने हैं तो आना बा'द तेरे तुझ को हर इक शय यहाँ उजड़ी मिलेगी
Subhash Ehsaas
21 likes
इस दफ़ा भी जश्न-ए-आज़ादी नहीं है इस दफ़ा भी हम किसी की क़ैद में हैं
Subhash Ehsaas
0 likes
बीस साल जी के ये ख़याल है तेरे लिए ख़ुद-कुशी से भी कहीं हराम है तू ज़िंदगी
Subhash Ehsaas
21 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Subhash Ehsaas.
Similar Moods
More moods that pair well with Subhash Ehsaas's sher.







