बीस साल जी के ये ख़याल है तेरे लिए ख़ुद-कुशी से भी कहीं हराम है तू ज़िंदगी
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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है 'सुभाष एहसास' की सोहबत में दुनिया कुछ अकड़ में है मगर झूठी नहीं है
Subhash Ehsaas
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ये पता चला हमें तेरे इंतिज़ार में थोड़ी देर होने में कितनी देर लगती है
Subhash Ehsaas
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राएगानी के अगर मानी समझने हैं तो आना बा'द तेरे तुझ को हर इक शय यहाँ उजड़ी मिलेगी
Subhash Ehsaas
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इस दफ़ा भी जश्न-ए-आज़ादी नहीं है इस दफ़ा भी हम किसी की क़ैद में हैं
Subhash Ehsaas
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साथ में हैं कौन बंदे कौन हैं दुश्मन तुम्हारे बस नज़र भर देख कर के दो सफ़ों में बाँट देते
Subhash Ehsaas
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