चलो फिर से मिलें हम अजनबी बनकर चलो फिर से वफ़ा की क़स में हम खाएँ
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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अव्वल तो मैं नाराज़ नहीं होता हूँ लेकिन हो जाऊँ तो फिर मुझ सेा बुरा होता नहीं है
Ali Zaryoun
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आज हम दोनों को फ़ुर्सत है, चलो इश्क़ करें इश्क़ दोनों की ज़रूरत है, चलो इश्क़ करें
Rahat Indori
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तुम्हारी यादें हैं सो कैसे इनको भूल जाएँ हम भला कोई हवा के बिन जिया है और जी सकता है
ATUL SINGH
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जानता हूँ कि हवाएँ तुझे बहकाती हैं जा चराग़ों की तरह तू भी उजाला कर दे
ATUL SINGH
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बिछड़ कर तुम सेे वो दिन ज़िन्दगी में लौट आए हैं तुम्हें अब चाँद में हम देखते हैं और सो जाते हैं
ATUL SINGH
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बताओ मान लूँ कैसे कि ये मुमकिन नहीं है वो सारे ख़्वाब जो देखे थे हम ने सच न होंगे
ATUL SINGH
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ख़ूब-सूरत साथ बीते वो हमारे पल सभी थे थे मगर गुज़रे हुए बस वो हमारे कल सभी थे
ATUL SINGH
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