चाँद दर्पण में उतारा कि उसे छू पाऊँ फ़ासलों में न कमी हो सकी रत्ती भर भी
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ज़िक्र बादल का भी होना चाहिए सिर्फ़ सावन का यहाँ चर्चा हुआ
Javed Aslam
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उसी से प्यार है जिस से हमें नाराज़गी भी है जहाँ पर बैर होता है वहीं वाबस्तगी भी है
Javed Aslam
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ख़ार से कुछ गिला नहीं लेकिन फूल चुभने से दर्द होता है गर्म होती है उन की बात मगर दिल का माहौल सर्द होता है
Javed Aslam
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है नुक़्ता यही जिस पर ईमान सभी का है आया है जो दुनिया में लाज़िम उसे जाना है बर्दाश्त नहीं करतीं कहती हैं ये जागीरें तुम तो गए दुनिया से बस नाम हटाना है
Javed Aslam
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उम्र हर शख़्स काट लेता है ज़िंदगी चंद लोग जीते हैं
Javed Aslam
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