चंद लम्हों की शाम जैसे थे जा के आना भी सीख लेते तुम
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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जा तुझे जाने दिया जानाँ मेरी जानाँ जान अब तू हो गई अनजान हो जैसे
nakul kumar
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है कुछ ऐसा कि जैसे ये सब कुछ इस से पहले भी हो चुका है कहीं
Jaun Elia
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ज़िक्र बादल का भी होना चाहिए सिर्फ़ सावन का यहाँ चर्चा हुआ
Javed Aslam
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उम्र के बदले मिली है ज़िंदगी ज़िंदगी का वक़्त से सौदा हुआ
Javed Aslam
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उम्र हर शख़्स काट लेता है ज़िंदगी चंद लोग जीते हैं
Javed Aslam
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वो मुहब्बत के इवज़ जान भी दे देते हैं रस्म सदियों से यही आम है परवानों में
Javed Aslam
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मतलब पेपर-वेट के जैसा होता है रिश्तों के काग़ज़ पे ये बैठा होता है
Javed Aslam
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