चंद मख़्सूस दरख़्तों से मुहब्बत का जुनून कुछ परिंदों को कहीं का नहीं रहने देता
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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कोई हसीन बदन जिन की दस्तरस में नहीं यही कहेंगे कि कुछ फ़ाएदा हवस में नहीं
Umair Najmi
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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हाल न पूछो मोहन का सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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सुना है 'मीर' को पढ़ने लगा है वो जब से बहुत उदास सा रहता है बोलता भी नहीं
divya 'sabaa'
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यूँँ तो तमाम रंग थे तस्वीर में मिरी लेकिन सियाह रंग ने बेहतर किया मुझे
divya 'sabaa'
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हमारा क़त्ल पहेली है एक इक के लिए किसी को क्या है ख़बर हम ने ख़ुद-कुशी की है
divya 'sabaa'
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उस से बे-दर्दी का शिकवा ठीक नहीं है हम भी उस सेे कौन सा बे-मतलब मिलते हैं
divya 'sabaa'
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दयार-ए-हिज्र की तन्हा उदास रातों में रवाँ-दवाँ तिरी आवाज़-ए-पा अभी तक है
divya 'sabaa'
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