छोड़ चला जाता है नाज़ उठाने वाला सो ज़्यादा नखरे भी ठीक नहीं होते हैं
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया
Majrooh Sultanpuri
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अब मिरा ध्यान कहीं और चला जाता है अब कोई फ़िल्म मुकम्मल नहीं देखी जाती
Jawwad Sheikh
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जब भी दीवाना कोई राह भटक जाता है सब से पहले तो मेरा आप पे शक जाता है
Vikram Gaur Vairagi
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उस को भुला कर मुझ को ये मालूम हुआ आदत कैसी भी हो छोड़ी जा सकती है
Nadeem Shaad
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ये सही है दरमियाँ कुछ भी नहीं अब है हमारे पर मेरी जानिब मुहब्बत को निभाया तो गया है
Prashant Sitapuri
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उस का कहना था साथ रहना है उस की बातों पे ख़ूब हँसता हूँ
Prashant Sitapuri
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दो भाइयों के बीच के आँगन का दर्द हूँ दीवार दरमियाँ मेरे खींची गई है आज
Prashant Sitapuri
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एक दफ़ा सबने रोक लिया था मुझ को वर्ना तो मेरे हाँथो से दुनिया को आग लगाई जाती
Prashant Sitapuri
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एक एहसान कीजिए साहब मुझ को हैरान कीजिए साहब आप सरकारी महक में से हैं कुछ परेशान कीजिए साहब
Prashant Sitapuri
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