डरावनी है जो तुझ को तिरी क़ज़ा ही न हो न भाग इतना कि अंजाम का पता ही न हो दिखावे की होड़ में क्या मिले नहीं आप से दिखा रहे जैसे कुछ भी अता पता ही न हो
Related Sher
हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
979 likes
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
Jaun Elia
148 likes
अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
140 likes
मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
118 likes
ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
Jigar Moradabadi
114 likes
More from Shubham Rai 'shubh'
तजरबा बस तुम्हें है जीने का हम ने तो ज़िंदगी गँवाई है दस्त के आप ही मुसाफ़िर हो ख़ाक हम ने कहाँ उड़ाई है
Shubham Rai 'shubh'
0 likes
कहानी तुम्हारी है हीरो हो तुम कहाँ कह रहे हम कि ज़ीरो हो तुम
Shubham Rai 'shubh'
0 likes
अभी जंग जारी है हारा नहीं हूँ कि हथियार अपना उतारा नहीं हूँ ज़मीं है ये मेरी न ललकारो मुझ को सुनामी हूँ मैं कोई धारा नहीं हूँ
Shubham Rai 'shubh'
1 likes
साँस लेने के भी पैसे देने होंगे इस क़दर महँगाई बढ़ती जा रही है
Shubham Rai 'shubh'
0 likes
साथ क्या हम चले कुछ क़दम दोस्त लगने लगे सारे ग़म बात चलने लगी आप की हँसते हँसते लगे रोने हम
Shubham Rai 'shubh'
7 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shubham Rai 'shubh'.
Similar Moods
More moods that pair well with Shubham Rai 'shubh''s sher.







