दौड़ में जो था अकेला मात ख़ुदस खा गया वो
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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पहले हम को घर बनाया फिर हमें खंडर बनाया
Sourabh Ratnawat
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हम को मिट्टी में मिला कर ख़ुद को कूज़ा-गर बनाया
Sourabh Ratnawat
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आसमाँ में टूटते तारे तो देखे हैं कई आज इक तारा ज़मीं पर देखा हम ने टूटते
Sourabh Ratnawat
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हम ने जंगल काट डाले बद-नुमा मंज़र बनाया
Sourabh Ratnawat
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दुश्मनों से मिल के उस ने इक नया लश्कर बनाया हार जब दुश्मन गया तो सुल्ह का अवसर बनाया
Sourabh Ratnawat
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