दुश्मनों से मिल के उस ने इक नया लश्कर बनाया हार जब दुश्मन गया तो सुल्ह का अवसर बनाया
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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हम ने जंगल काट डाले बद-नुमा मंज़र बनाया
Sourabh Ratnawat
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हम को मिट्टी में मिला कर ख़ुद को कूज़ा-गर बनाया
Sourabh Ratnawat
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पहले हम को घर बनाया फिर हमें खंडर बनाया
Sourabh Ratnawat
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दौड़ में जो था अकेला मात ख़ुदस खा गया वो
Sourabh Ratnawat
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आसमाँ में टूटते तारे तो देखे हैं कई आज इक तारा ज़मीं पर देखा हम ने टूटते
Sourabh Ratnawat
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