दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ
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जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं वही दुनिया बदलते जा रहे हैं
Jigar Moradabadi
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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और
Mirza Ghalib
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हम ने दुनिया की तरफ़ देखा नहीं तुम को चाहा और कुछ सोचा नहीं
Aalok Shrivastav
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कोई काँटा कोई पत्थर नहीं है तो फिर तू सीधे रस्ते पर नहीं है मैं इस दुनिया के अंदर रह रहा हूँ मगर दुनिया मेरे अंदर नहीं है
Zubair Ali Tabish
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मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है
Rajesh Reddy
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तुम जो हँसती हो तो मस्ताना कँवल लगती हो 'मीर' का शे'र हो 'ग़ालिब' की ग़ज़ल लगती हो संग-ए-मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन साँस लेता हुआ इक ताजमहल लगती हो
Hasrat Jaipuri
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ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ
Hasrat Jaipuri
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किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँँ नहीं देते
Hasrat Jaipuri
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कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़ कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी
Hasrat Jaipuri
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ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी
Hasrat Jaipuri
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