ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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तुम जो हँसती हो तो मस्ताना कँवल लगती हो 'मीर' का शे'र हो 'ग़ालिब' की ग़ज़ल लगती हो संग-ए-मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन साँस लेता हुआ इक ताजमहल लगती हो
Hasrat Jaipuri
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किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँँ नहीं देते
Hasrat Jaipuri
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कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़ कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी
Hasrat Jaipuri
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दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ
Hasrat Jaipuri
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ख़ुदा जाने किस किस की ये जान लेगी वो क़ातिल अदा वो क़ज़ा महकी महकी
Hasrat Jaipuri
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