तुम जो हँसती हो तो मस्ताना कँवल लगती हो 'मीर' का शे'र हो 'ग़ालिब' की ग़ज़ल लगती हो संग-ए-मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन साँस लेता हुआ इक ताजमहल लगती हो
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँँ नहीं देते
Hasrat Jaipuri
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ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ
Hasrat Jaipuri
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जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँँ नहीं देते ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँँ नहीं देते
Hasrat Jaipuri
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हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं वो ग़ैर की बाँहों में आराम से सोते हैं
Hasrat Jaipuri
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दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ
Hasrat Jaipuri
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