हम रातों को उठ उठ के जिन के लिए रोते हैं वो ग़ैर की बाँहों में आराम से सोते हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम जो हँसती हो तो मस्ताना कँवल लगती हो 'मीर' का शे'र हो 'ग़ालिब' की ग़ज़ल लगती हो संग-ए-मरमर से तराशा हुआ शफ़्फ़ाफ़ बदन साँस लेता हुआ इक ताजमहल लगती हो
Hasrat Jaipuri
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ये किस ने कहा है मिरी तक़दीर बना दे आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिए आ
Hasrat Jaipuri
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किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँँ नहीं देते
Hasrat Jaipuri
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कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़ कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी
Hasrat Jaipuri
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दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे हर रस्म-ए-मोहब्बत को मिटाने के लिए आ
Hasrat Jaipuri
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