देखा न कोहकन कोई फ़रहाद के बग़ैर आता नहीं है फ़न कोई उस्ताद के बग़ैर
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कितना महफ़ूज़ हूँ मैं कोने में कोई अड़चन नहीं है रोने में मैं ने उस को बचा लिया वरना डूब जाता मुझे डुबोने में
Fahmi Badayuni
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लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है
Unknown
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टकरा गया वो मुझ से किताबें लिए हुए फिर मेरा दिल और उस की किताबें बिखर गईं
Unknown
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ये साल भी उदासियाँ दे कर चला गया तुम से मिले बग़ैर दिसम्बर चला गया
Unknown
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चल दिए घर से तो घर नहीं देखा करते जाने वाले कभी मुड़ कर नहीं देखा करते सीपियाँ कौन किनारे से उठा कर भागा ऐसी बातें समुंदर नहीं देखा करते
Unknown
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अरक़ नहीं तिरे रू से गुलाब टपके है अजब ये बात है शो'ले से आब टपके है
Unknown
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