dhoka hai ek fareb hai manzil ka har khayal sach puchhiye to sara safar wapsi ka hai
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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घर से निकले थे हौसला कर के लौट आए ख़ुदा ख़ुदा कर के ज़िंदगी तो कभी नहीं आई मौत आई ज़रा ज़रा कर के
Rajesh Reddy
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दोस्तों का क्या है वो तो यूँँ भी मिल जाते हैं मुफ़्त रोज़ इक सच बोल कर दुश्मन कमाने चाहिएँ
Rajesh Reddy
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धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
Rajesh Reddy
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आसमाँ ने बंद कर लीं खिड़कियाँ अब ज़मीं में उस की दिलचस्पी नहीं
Rajesh Reddy
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नई लाशें बिछाने के लिए ही गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं
Rajesh Reddy
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