दिल ए मरीज़ ने दिल से तुझे पुकारा है तू मेरी ज़ीस्त का अब आख़िरी सहारा है
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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मुझ को अब चैन से जीने की तमन्ना ही नहीं बस ये ख़्वाहिश है कि अब चैन से मर जाऊँ मैं
Almas Rizvi
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हम कि जी से उतर गए सबके वो कि दिल में समाए जाते हैं
Almas Rizvi
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अता किया हुआ नाम ओ नुमूद बे-मानी न हो ख़ुलूस तो सारे सुजूद बे-मानी
Almas Rizvi
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कोई हिजरत कोई विसाल नहीं ख़्वाब में भी तेरा ख़याल नहीं सी लिए होंठ रब की मर्ज़ी पे मेरे लब पर कोई सवाल नहीं
Almas Rizvi
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इस मतलबी जहान में अपना नहीं मिला ग़म तो मिले ग़मों का मदावा नहीं मिला लोगों का इक हुजूम था मतलब के वास्ते चाहे जो दिल से एक भी ऐसा नहीं मिला
Almas Rizvi
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