कोई हिजरत कोई विसाल नहीं ख़्वाब में भी तेरा ख़याल नहीं सी लिए होंठ रब की मर्ज़ी पे मेरे लब पर कोई सवाल नहीं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम कि जी से उतर गए सबके वो कि दिल में समाए जाते हैं
Almas Rizvi
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दिल ए मरीज़ ने दिल से तुझे पुकारा है तू मेरी ज़ीस्त का अब आख़िरी सहारा है
Almas Rizvi
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मुझ को अब चैन से जीने की तमन्ना ही नहीं बस ये ख़्वाहिश है कि अब चैन से मर जाऊँ मैं
Almas Rizvi
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इस मतलबी जहान में अपना नहीं मिला ग़म तो मिले ग़मों का मदावा नहीं मिला लोगों का इक हुजूम था मतलब के वास्ते चाहे जो दिल से एक भी ऐसा नहीं मिला
Almas Rizvi
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अता किया हुआ नाम ओ नुमूद बे-मानी न हो ख़ुलूस तो सारे सुजूद बे-मानी
Almas Rizvi
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