दीया जलाकर छोड़ते अक्सर ज़माने में सभी अब कौन जुगनू पूछता है रौशनी के बा'द भी
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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पोशीदा के जैसे सपने झाँक रहे थे मिरे सभी शायद मिरे पिता आज भी पुराना कपड़ा पहने हैं
Ganesh gorakhpuri
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सब राजा और साथ में सारे इक्के भी थे शामिल ये ज़िंदगी किसी जोकर से कभी नहीं जीती मैं ने
Ganesh gorakhpuri
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गुलाब सूख गए हैं किताब में सारे नज़र छिपा के गए हैं नक़ाब में सारे हमें लगा कि सभी लोग शांत हैं बैठे मिले ज़हीर-ए-साकी शराब में सारे
Ganesh gorakhpuri
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हमारे चाहने से कुछ नहीं होगा नदी है वो कभी वापस नहीं मुड़ती
Ganesh gorakhpuri
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जिसे है काटनी ता'उम्र सारी ज़िंदगी मेरी हमारा दिल हमारा ही नहीं सुनता परेशां है
Ganesh gorakhpuri
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