दुख की दीमक अगर नहीं लगती ज़िन्दगी किस क़द्र हसीं लगती वस्ल को लॉटरी समझता हूँ लॉटरी रोज़ तो नहीं लगती
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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रोज़ इक झील राह तकती है खींच लेता है एक अलाव मुझे जन्नती हूँ तो फिर बढ़ो आगे तितलियों आओ गुदगुदाओ मुझे
Azbar Safeer
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चमेली रात कह रही थी मेरी बू लिया करें और इस सेे जी नहीं भरे तो मुझ को छू लिया करें कभी भी अच्छे देवता नहीं बनेंगे ऐसे आप चढ़ावे में रुपए नहीं फ़क़त लहू लिया करें
Azbar Safeer
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पहले कहता है जुनूँ उस का गिरेबान पकड़ फिर मेरा दिल मुझे कहता है इधर कान पकड़ ऐसी वहशत भी न हो घर के दरो बाम कहें कोई आवाज़ ही ले आ कोई मेहमान पकड़
Azbar Safeer
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बिछड़े तो रख रखाव भी करना नहीं पड़ा ताज़ा किसी को घाव भी करना नहीं पड़ा बस देख कर ही उस को परिंदे उतर गए उस को तो आओ आओ भी करना नहीं पड़ा
Azbar Safeer
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