पहले कहता है जुनूँ उस का गिरेबान पकड़ फिर मेरा दिल मुझे कहता है इधर कान पकड़ ऐसी वहशत भी न हो घर के दरो बाम कहें कोई आवाज़ ही ले आ कोई मेहमान पकड़
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तू मिला ही नहीं मगर फिर भी है बिछड़ने का मुझ को डर फिर भी जानता हूँ तू आ नहीं सकता पर सजाया है मैं ने घर फिर भी
Sandeep Thakur
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रोज़ इक झील राह तकती है खींच लेता है एक अलाव मुझे जन्नती हूँ तो फिर बढ़ो आगे तितलियों आओ गुदगुदाओ मुझे
Azbar Safeer
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चमेली रात कह रही थी मेरी बू लिया करें और इस सेे जी नहीं भरे तो मुझ को छू लिया करें कभी भी अच्छे देवता नहीं बनेंगे ऐसे आप चढ़ावे में रुपए नहीं फ़क़त लहू लिया करें
Azbar Safeer
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बिछड़े तो रख रखाव भी करना नहीं पड़ा ताज़ा किसी को घाव भी करना नहीं पड़ा बस देख कर ही उस को परिंदे उतर गए उस को तो आओ आओ भी करना नहीं पड़ा
Azbar Safeer
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दुख की दीमक अगर नहीं लगती ज़िन्दगी किस क़द्र हसीं लगती वस्ल को लॉटरी समझता हूँ लॉटरी रोज़ तो नहीं लगती
Azbar Safeer
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