sherKuch Alfaaz

रोज़ इक झील राह तकती है खींच लेता है एक अलाव मुझे जन्नती हूँ तो फिर बढ़ो आगे तितलियों आओ गुदगुदाओ मुझे

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

Abrar Kashif

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प्यार का रिश्ता ऐसा रिश्ता शबनम भी चिंगारी भी या'नी उन सेे रोज़ ही झगड़ा और उन्हीं से यारी भी

Ateeq Allahabadi

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अब मैं क्या अपनी मोहब्बत का भरम भी न रखूँ मान लेता हूँ कि उस शख़्स में था कुछ भी नहीं

Jawwad Sheikh

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तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता है कि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता है है बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते ही वो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है

Tehzeeb Hafi

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न शब-ओ-रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है किस बरहमन ने कहा था कि ये साल अच्छा है

Ahmad Faraz

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