दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो मेरे में'यार का तक़ाज़ा है मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मुहब्बत भी मुसीबत है करें क्या मगर अपनी ज़रूरत है करें क्या हम उस से बच के चलना चाहते हैं मगर वो ख़ूब-सूरत है करें क्या
Akhtar Shumar
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मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने तू समझता है मुझे तुझ सेे गिला कुछ भी नहीं
Akhtar Shumar
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मुद्दतों में आज दिल ने फ़ैसला आख़िर दिया ख़ूब-सूरत ही सही लेकिन ये दुनिया झूट है
Akhtar Shumar
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