मुहब्बत भी मुसीबत है करें क्या मगर अपनी ज़रूरत है करें क्या हम उस से बच के चलना चाहते हैं मगर वो ख़ूब-सूरत है करें क्या
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने तू समझता है मुझे तुझ सेे गिला कुछ भी नहीं
Akhtar Shumar
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मुद्दतों में आज दिल ने फ़ैसला आख़िर दिया ख़ूब-सूरत ही सही लेकिन ये दुनिया झूट है
Akhtar Shumar
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दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो मेरे में'यार का तक़ाज़ा है मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
Akhtar Shumar
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