मुद्दतों में आज दिल ने फ़ैसला आख़िर दिया ख़ूब-सूरत ही सही लेकिन ये दुनिया झूट है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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मैं तो इस वास्ते चुप हूँ कि तमाशा न बने तू समझता है मुझे तुझ सेे गिला कुछ भी नहीं
Akhtar Shumar
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मुहब्बत भी मुसीबत है करें क्या मगर अपनी ज़रूरत है करें क्या हम उस से बच के चलना चाहते हैं मगर वो ख़ूब-सूरत है करें क्या
Akhtar Shumar
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दुश्मनी कर मगर उसूल के साथ मुझ पर इतनी सी मेहरबानी हो मेरे में'यार का तक़ाज़ा है मेरा दुश्मन भी ख़ानदानी हो
Akhtar Shumar
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