इक लड़की है जो इकदम घर जैसी है वो बिल्कुल माँ जैसी बातें करती है
Related Sher
माँग सिन्दूर भरी हाथ हिनाई कर के रूप जोबन का ज़रा और निखर आएगा जिस के होने से मेरी रात है रौशन रौशन चाँद में आज वही अक्स नज़र आएगा
Azhar Iqbal
67 likes
राम भी हैं कृष्ण भी हैं और भोलेनाथ हैं माँ तुम्हारे साथ हैं तो सब तुम्हारे साथ हैं
Tanoj Dadhich
67 likes
उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
Seemab Akbarabadi
60 likes
तुम भी उल्टी उल्टी बातें पूछते हो हम भी कैसी कैसी क़स में खाते हैं
Baqi Siddiqui
60 likes
उस के चेहरे की चमक के सामने सादा लगा आसमाँ पे चाँद पूरा था मगर आधा लगा
Iftikhar Naseem
95 likes
More from Siddharth Saaz
हम लोग चूंकि दश्त के पाले हुए हैं सो ख़्वाबों में चाहे झील हों, आँखों में पेड़ हैं
Siddharth Saaz
2 likes
ये ग़म हम को पत्थर कर देगा इक दिन कोई आ कर हमें रुलाओ पहले तो
Siddharth Saaz
4 likes
भले ही प्यार हो या हिज्र हो या फिर सियासत हो कुछ ऐसे दोस्त थे हर बात पर अश'आर कहते थे
Siddharth Saaz
10 likes
तू बुझा कर रख गया था जबसे इस दिल के चराग़ हम ने इस घर में नहीं की रौशनाई आज तक
Siddharth Saaz
1 likes
तमाम मस'अले उठाए फिर रहे हैं हम इसीलिए भी चलते चलते थक गए हैं हम थे कितने कम-नसीब हम कि राबता न था हैं कितने ख़ुशनसीब तुझ को छू रहे हैं हम
Siddharth Saaz
8 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Siddharth Saaz.
Similar Moods
More moods that pair well with Siddharth Saaz's sher.







