इक मसीहा को फ़िक्र है अपनी कह रहा था ख़याल है सबका
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है
Abrar Kashif
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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तुझ सेे कोई शे'र कह दूँ, हर्ज क्या है मुझ को ये मालूम है बस, ज़ाया' होगा
pankaj pundir
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तुम को सब अपने प्रेम करते हैं कैसे समझोगे तुम शिवा का दर्द
pankaj pundir
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यार कोई तो उस को समझाओ प्यार की नाव पर अना का बोझ
pankaj pundir
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हुई शाम मेरे गले लग गया ये दिन-भर का जैसे थका-हारा दिन
pankaj pundir
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तीरगी से पस्त लोग बरहना-पा आ गए हैं अब फ़लक पे चाँद आया रात का जवाब आया
pankaj pundir
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