तुझ सेे कोई शे'र कह दूँ, हर्ज क्या है मुझ को ये मालूम है बस, ज़ाया' होगा
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मुझ सेे बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ सेे बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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यार कोई तो उस को समझाओ प्यार की नाव पर अना का बोझ
pankaj pundir
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तुम पे लाज़िम था सफ़र आसान करना इश्क़ का बा'द लुटने के लुटेरा तो नहीं बन जाना था
pankaj pundir
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तुम को सब अपने प्रेम करते हैं कैसे समझोगे तुम शिवा का दर्द
pankaj pundir
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वक़्त के साथ हुए साथ जो दिन रहने के फिर किसी साल महीने में नहीं आएँगे
pankaj pundir
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शह्र-ए-दिल के सर्द मौसम और सादा-रूह हम सारी माचिस फूँक बैठे इक ज़रा सी आग को
pankaj pundir
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