इक समुंदर ने डुबोने की मुझे साज़िश की है मैं ने बन तूफ़ान फिर से उठने की कोशिश की है
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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तेरे माथे को चूमूँ मैं मुहब्बत भर के देखूँ हवस से ख़ाली होकर रूह के ग़म हर के देखूँ
Manish
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रूह के ज़ख़्म की सब दवा मिल गई जब मोहब्बत की तेरे हवा मिल गई
Manish
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ख़ुशबू मोहब्बत की तेरी हर श्वास में है कब से मेरा दिल इस सबब एहसास में है
Manish
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जब ख़ुदा की दो निगाहें अश्क से यूँँ भर गई सब दुआएँ हूर बन कर आसमाँ सर कर गई
Manish
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परस्तिश नेक हो मंदिर अज़ानों से बरसती हैं दुआएँ आसमानों से
Manish
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