फ़ासला हो भले पर रहेंगे सदा रेल की पटरियों की तरह साथ हम
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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इश्क़ की इक रंगीन सदा पर बरसे रंग रंग हो मजनूँ और लैला पर बरसे रंग
Swapnil Tiwari
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फ़ासला रख कर भी क्या हासिल हुआ आज भी उस का ही कहलाता हूँ मैं
Shariq Kaifi
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सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो ख़तरा तो मुफ़्त में भी नहीं लेना चाहिए घर से निकल के मोल न लो फ़ासला रखो
Jawwad Sheikh
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उड़ानें ऊंँची भरते हैं वो जिन के पर नहीं होते जो अक्सर घर बनाते हैं उन्हीं के घर नहीं होते
SHIV SAFAR
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ये दुनिया जो अपनों को भी याद नहीं अब करती है मुझ को याद रखेगी इस उम्मीद पे ही दम तोड़ा हूँ
SHIV SAFAR
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तुम्हें इन बाहों में भरकर ख़ुशी से झूम लूॅंगा मैं अगर तुम ने जो कुछ पूछा क़सम से चूम लूॅंगा मैं
SHIV SAFAR
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रह जाएगा ये दीद-ए-असद ख़्वाब ही ‘सफ़र’ ‘ग़ालिब’ के दौर में जो न जन्में तो अब मरो
SHIV SAFAR
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वो अब मेरा नहीं ये मानना आसाँ यूँँ हो जाए बराबर एक्स के कुछ मान लेना जितना आसाँ था
SHIV SAFAR
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