फ़ासला रख कर भी क्या हासिल हुआ आज भी उस का ही कहलाता हूँ मैं
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कौन कह सकता है उस को देख कर ये वही है जो हमारा था कभी
Shariq Kaifi
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फिर तुम्हारे बराबर खड़ा शख़्स कुछ इस तरह से हँसा जैसे तुम ने बताया हो उस को है ये भी दीवाना मेरा
Shariq Kaifi
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बैठ कर बात की और जुदा हो गए कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं
Shariq Kaifi
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जितनी चाहे पी लो लेकिन ध्यान रहे तुम को घर पहुँचाने वाले अच्छे हों
Shariq Kaifi
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उसे यूँँ चेहरा-चेहरा ढूँढ़ता हूँ वो जैसे रात-दिन सड़कों पे होगा
Shariq Kaifi
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