फ़क़त रंग ही उन का काला नहीं है इसी क़िस्म की ख़ूबियाँ और भी हैं
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ईद पर मसरूर हैं दोनों मियाँ बीवी बहुत इक ख़रीदारी से पहले इक ख़रीदारी के ब'अद
Sarfaraz Shahid
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इस दौर के मर्दों की जो की शक्ल-शुमारी साबित हुआ दुनिया में ख़्वातीन बहुत हैं
Sarfaraz Shahid
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स्पैशलिस्ट पेन-किलर दे तो कौन सा? ''सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है''
Sarfaraz Shahid
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हो सके तो तुम बचा लो अब भी देसी नस्ल को वर्ना पीछे सिर्फ़ ''शेवर'' मुर्ग़ियाँ रह जाएँगी
Sarfaraz Shahid
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लबों में आ के क़ुल्फ़ी हो गए अश'आर सर्दी में ग़ज़ल कहना भी अब तो हो गया दुश्वार सर्दी में
Sarfaraz Shahid
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