इस दौर के मर्दों की जो की शक्ल-शुमारी साबित हुआ दुनिया में ख़्वातीन बहुत हैं
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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उस को भुला कर मुझ को ये मालूम हुआ आदत कैसी भी हो छोड़ी जा सकती है
Nadeem Shaad
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम सेे मिल कर इतनी तो उम्मीद हुई है इस दुनिया में वक़्त बिताया जा सकता है
Manoj Azhar
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इस दौर-ए-सियासत का इतना सा फ़साना है बस्ती भी जलानी है मातम भी मनाना है
Unknown
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स्पैशलिस्ट पेन-किलर दे तो कौन सा? ''सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है''
Sarfaraz Shahid
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हो सके तो तुम बचा लो अब भी देसी नस्ल को वर्ना पीछे सिर्फ़ ''शेवर'' मुर्ग़ियाँ रह जाएँगी
Sarfaraz Shahid
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ईद पर मसरूर हैं दोनों मियाँ बीवी बहुत इक ख़रीदारी से पहले इक ख़रीदारी के ब'अद
Sarfaraz Shahid
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बजट की कई सख़्तियाँ और भी हैं अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
Sarfaraz Shahid
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फ़क़त रंग ही उन का काला नहीं है इसी क़िस्म की ख़ूबियाँ और भी हैं
Sarfaraz Shahid
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