ईद पर मसरूर हैं दोनों मियाँ बीवी बहुत इक ख़रीदारी से पहले इक ख़रीदारी के ब'अद
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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इस दौर के मर्दों की जो की शक्ल-शुमारी साबित हुआ दुनिया में ख़्वातीन बहुत हैं
Sarfaraz Shahid
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स्पैशलिस्ट पेन-किलर दे तो कौन सा? ''सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है''
Sarfaraz Shahid
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फ़क़त रंग ही उन का काला नहीं है इसी क़िस्म की ख़ूबियाँ और भी हैं
Sarfaraz Shahid
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बजट की कई सख़्तियाँ और भी हैं अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं
Sarfaraz Shahid
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हो सके तो तुम बचा लो अब भी देसी नस्ल को वर्ना पीछे सिर्फ़ ''शेवर'' मुर्ग़ियाँ रह जाएँगी
Sarfaraz Shahid
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