फ़िल्म हो या अस्लियत लड़का ही क्यूँ पगलाता है इश्क़ हो या जंग हो लड़का ही मारा जाता है
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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शव बूढ़े पिताजी का काँपना ही था बेटे ने अरसे बा'द छुआ जो था
Sachit Agrawal
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मुझ को तलब तो जिस्म की थी ही नहीं अब दिल लगाने की भी हसरत मिट गई
Sachit Agrawal
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वक़्त भी अपने भीतर कितना बोझ लिए चलता होगा रिश्ता कोई भी टूटे इल्ज़ाम समय पर आता है
Sachit Agrawal
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बारिश का पानी गुम-सुम है नाव नहीं बनती बच्चों से
Sachit Agrawal
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आता नहीं है घर में राशन इश्क़ से आशिक़ तभी तो नौकरी करने लगे
Sachit Agrawal
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