मुझ को तलब तो जिस्म की थी ही नहीं अब दिल लगाने की भी हसरत मिट गई
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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शव बूढ़े पिताजी का काँपना ही था बेटे ने अरसे बा'द छुआ जो था
Sachit Agrawal
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फ़िल्म हो या अस्लियत लड़का ही क्यूँ पगलाता है इश्क़ हो या जंग हो लड़का ही मारा जाता है
Sachit Agrawal
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आता नहीं है घर में राशन इश्क़ से आशिक़ तभी तो नौकरी करने लगे
Sachit Agrawal
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वक़्त भी अपने भीतर कितना बोझ लिए चलता होगा रिश्ता कोई भी टूटे इल्ज़ाम समय पर आता है
Sachit Agrawal
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बारिश का पानी गुम-सुम है नाव नहीं बनती बच्चों से
Sachit Agrawal
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