हाथ सर पे रख रहे गुस्ताख़ ख़ाली जल गया जब सब बची है राख़ ख़ाली इन ठिकानों पर भला अब कौन चहके सब परिंदे उड़ गए हैं शाख़ ख़ाली
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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या'नी तुम वो हो वाक़ई हद है मैं तो सच-मुच सभी को भूल गया
Jaun Elia
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उस के आगे कहें मजाल करें बोल सकते हैं जो मलाल करें आप शाइ'र हैं कह के वो मुझ सेे रोज़ कहता है इक सवाल करें
Subodh Sharma "Subh"
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तू बता कैसे मैं ख़ुद को इस तरह से बाँट लूँ एक चुनना है मुझे फिर क्यूँ दहाई छाँट लूँ वो गले लग कर मुझे रोता है 'शुभ' हर बार तो पहले ग़ुस्सा कर चुका हूँ अब ज़रा सा डाँट लूँ
Subodh Sharma "Subh"
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देखता मैं रोज़ सर तन से जुदा होते हुए हाथ में तलवार पकड़े हैं ख़ुदा होते हुए
Subodh Sharma "Subh"
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तुम हो ज़ोया इश्क़ मेरा इस बनारस की तरह पर मैं कुंदन तो नहीं हूँ जो कलाई काट लूँ
Subodh Sharma "Subh"
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सर्द का मौसम था वो अपने गाँव से चल कर आती थी उस के बालों पलकों पे गिर के शबनम इठलाती थी बुशरा लहजा गाल गुलाबी और बहुत कुछ था लेकिन सब सेे ज़्यादा मुझ को उस की भूरी आँखें भाती थी
Subodh Sharma "Subh"
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