देखता मैं रोज़ सर तन से जुदा होते हुए हाथ में तलवार पकड़े हैं ख़ुदा होते हुए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है इस का मतलब है जा चुके हो तुम
Zubair Ali Tabish
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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उस के आगे कहें मजाल करें बोल सकते हैं जो मलाल करें आप शाइ'र हैं कह के वो मुझ सेे रोज़ कहता है इक सवाल करें
Subodh Sharma "Subh"
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चल दिया पलट के मैं घर ख़ुमार बाक़ी है कुछ सुधार है मुझ में कुछ सुधार बाक़ी है साथ जो मेरे था, मैं क़र्ज़-दार सबका हूँ शुक्र है ख़ुदा मुझ पे इक उधार बाक़ी है
Subodh Sharma "Subh"
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आता है काम कब ये सिखाया हुआ सबक़ सब सीख के भी हाथ पे छाले पड़े रहे
Subodh Sharma "Subh"
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सर्द का मौसम था वो अपने गाँव से चल कर आती थी उस के बालों पलकों पे गिर के शबनम इठलाती थी बुशरा लहजा गाल गुलाबी और बहुत कुछ था लेकिन सब सेे ज़्यादा मुझ को उस की भूरी आँखें भाती थी
Subodh Sharma "Subh"
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किताबों में मेरा दिल है यहीं रखना लिखा हो नाम उस का बस वहीं रखना वहीं रखना जहाँ पे छाँव हो उस की वगरना क़ब्र सहरा में नहीं रखना
Subodh Sharma "Subh"
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