किताबों में मेरा दिल है यहीं रखना लिखा हो नाम उस का बस वहीं रखना वहीं रखना जहाँ पे छाँव हो उस की वगरना क़ब्र सहरा में नहीं रखना
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उस के आगे कहें मजाल करें बोल सकते हैं जो मलाल करें आप शाइ'र हैं कह के वो मुझ सेे रोज़ कहता है इक सवाल करें
Subodh Sharma "Subh"
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चल दिया पलट के मैं घर ख़ुमार बाक़ी है कुछ सुधार है मुझ में कुछ सुधार बाक़ी है साथ जो मेरे था, मैं क़र्ज़-दार सबका हूँ शुक्र है ख़ुदा मुझ पे इक उधार बाक़ी है
Subodh Sharma "Subh"
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देखता मैं रोज़ सर तन से जुदा होते हुए हाथ में तलवार पकड़े हैं ख़ुदा होते हुए
Subodh Sharma "Subh"
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सर्द का मौसम था वो अपने गाँव से चल कर आती थी उस के बालों पलकों पे गिर के शबनम इठलाती थी बुशरा लहजा गाल गुलाबी और बहुत कुछ था लेकिन सब सेे ज़्यादा मुझ को उस की भूरी आँखें भाती थी
Subodh Sharma "Subh"
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हाथ सर पे रख रहे गुस्ताख़ ख़ाली जल गया जब सब बची है राख़ ख़ाली इन ठिकानों पर भला अब कौन चहके सब परिंदे उड़ गए हैं शाख़ ख़ाली
Subodh Sharma "Subh"
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