hamari zindagi par maut bhi hairan hai 'ghaer' na jaane kis ne ye tarikh-e-paidaish nikali hai
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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मुझ से रस्तों का बिछड़ना नहीं देखा जाता मुझ से मिलने वो किसी मोड़ पे आया न करे
Kashif Husain Ghair
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इन मकीनों का सुलूक अपनी जगह दर-ओ-दीवार पे हैरत है मुझे
Kashif Husain Ghair
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हमारी सुब्ह किसी शाम से नहीं मिलती ये वो थकन है जो आराम से नहीं मिलती
Kashif Husain Ghair
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हाल पूछा न करे हाथ मिलाया न करे मैं इसी धूप में ख़ुश हूँ कोई साया न करे
Kashif Husain Ghair
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वो हाल था कि बस मिरा उठना मुहाल था लेकिन फिर एक ख़्वाब की तकमील से उठा
Kashif Husain Ghair
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