होंठ है ख़ामोश फिर भी बोलती हैं ये निगाहें आज के इस दौर में भी सादगी क्या ख़ूब लगती
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उछालेंगे सभी क़िस्से मिरे तौहीन भी होगी अगर तुम को यक़ीं है तो ज़माने से नहीं डरना
Ganesh gorakhpuri
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पोशीदा के जैसे सपने झाँक रहे थे मिरे सभी शायद मिरे पिता आज भी पुराना कपड़ा पहने हैं
Ganesh gorakhpuri
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वस्ल का दिन अभी पूछ लो तुम हिज्र में रात काटी गई है
Ganesh gorakhpuri
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इश्क़ में डूबने का मज़ा और है तैरना सीख लें सब ज़रूरी नहीं
Ganesh gorakhpuri
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बहुत दिनों से था इक रिश्ता मैं तोड़ कर उसे आया हूँ चराग़ देने वालो समझो मैं चाँद छोड़ के आया हूँ
Ganesh gorakhpuri
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