हमारी ख़्वाहिश है पेड़ जिस को लगाया तुम ने हरा रहे बस वगरना कोई भी घाव ऐसा नहीं है जिस की दवा नहीं है
Related Sher
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
298 likes
कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
321 likes
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
373 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
More from Atul K Rai
उस पे हम चीख़ ही नहीं सकते उस की चुप्पी कमाल करती है!
Atul K Rai
0 likes
ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
0 likes
ज़माना ग़ौर से सुनता है उन को मुखर जो मौन होना जानते हैं
Atul K Rai
1 likes
कोई तो है चिढ़ाता है जो मुझ को मैं आईने में जब भी देखता हूँ
Atul K Rai
0 likes
ज़रा सी देर उठने में हुई क्या लगे सब पाँव दक्षिण ओर करने
Atul K Rai
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Atul K Rai.
Similar Moods
More moods that pair well with Atul K Rai's sher.







