हम को लूटा है रहबरों ने और रहज़नों से हमें शिकायत है
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये क़ैफियत है कि जब मेरा यार आँख में है गुलों का रंग, फिज़ां की बहार आँख में है
Sumit Panchal
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यही सबब है कि हम हिज्र से हैं अफ़्सुर्दा हर एक हिज्र से पैदा विसाल होता नहीं
Sumit Panchal
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कुछ मसर्रत के पाक़ लम्हे हैं हासिल-ए-ज़ीस्त है जो मेरे लिए
Sumit Panchal
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मेरी हयात के सब से हसीन दिन हैं ये मैं उम्र-ए-ख़िज़्र भी क़ुर्बान इस पे कर दूँगा
Sumit Panchal
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वो मेरे ख़्वाब की दहलीज़ तक तो आया था यहाँ भी वस्ल की सूरत न बनने पाई है
Sumit Panchal
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