हम सेे न देखी जाएगी रुस्वाई इश्क़ की मुमकिन हो तो मिटा दो महीना ए फ़रवरी
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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आज हम दोनों को फ़ुर्सत है, चलो इश्क़ करें इश्क़ दोनों की ज़रूरत है, चलो इश्क़ करें
Rahat Indori
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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वहशत है मुझ को लम्स के रिज़्क-ए-हराम से मुझ को मेरे नसीब की रोज़ी नहीं मिली
Harun Umar
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मेरी सूरत पे थूकने वालों मेरी सीरत को जान पाते, ख़ैर
Harun Umar
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मेरी ख़्वाहिश है मेरे मरने पर आप आएँ भगा दिए जाएँ
Harun Umar
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पहले निकले तो रूह भीतर से फिर तुम्हें एहतिमाम से भूलें
Harun Umar
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तेरे बिन जितने भी ये दिन कटे हैं समझ ले आग पर पैदल चले हैं
Harun Umar
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