हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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इस लिए ये महीना ही शामिल नहीं उम्र की जंत्री में हमारी उस ने इक दिन कहा था कि शादी है इस फरवरी में हमारी
Tehzeeb Hafi
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उसे समझने का कोई तो रास्ता निकले मैं चाहता भी यही था वो बे-वफ़ा निकले
Waseem Barelvi
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किसी ने मुफ्त में वो शख़्स पाया जो हर कीमत पे मुझ को चाहिए था
Uzair Hijazi
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आँख हो बंद तो वो अपना है आँख खुल जाए तो वो सपना है वो मिले या नहीं मिले हम को उम्र भर उस का नाम जपना है
Sandeep Thakur
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उस से इक बार तो रूठूँ मैं उसी की मानिंद और मेरी तरह से वो मुझ को मनाने आए
Parveen Shakir
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अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे
Parveen Shakir
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किस तरह मिरी रूह हरी कर गया आख़िर वो ज़हर जिसे जिस्म में खिलते नहीं देखा
Parveen Shakir
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लड़कियों के दुख अजब होते हैं सुख उस से अजीब हँस रही हैं और काजल भीगता है साथ साथ
Parveen Shakir
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दुख तो ऐसा है कि दिल आँख से कट कट के बहे एक वा'दा है कि रोने नहीं देता मुझ को
Parveen Shakir
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