हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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कुछ वक़्त ने तोड़ा है भरम और कुछ उस ने मैं तो ये समझता था कोई बात है मुझ में
Ashu Mishra
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ग़म में हम सूरत-ए-गमख़ार नहीं पढ़ते हैं इस लिए मीर के अश'आर नहीं पढ़ते हैं मेरी आँखें तेरी तस्वीर से जा लगती हैं सुब्ह उठकर सभी अख़बार नहीं पढ़ते हैं
Ashu Mishra
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और अब दुनिया मेरी तन्हाई में देती है दख़्ल मैं भी पत्थर फेंकता रहता था ठहरी झील पर
Ashu Mishra
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आप जिस चीज़ को कहते हैं कि बेहोशी है वो दिमाग़ों में ज़रा देर की ख़ामोशी है सूखते पेड़ से पंछी का जुदा हो जाना ख़ुद-परस्ती नहीं एहसान-फ़रामोशी है
Ashu Mishra
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तुम्हारी शक्ल किसी शक्ल से मिलाते हुए मैं खो गया हूँ नया रास्ता बनाते हुए
Ashu Mishra
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