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इक दफ़ा बस इक दफ़ा उस को हमारे साथ कर छत पे फिर से बैठ कर तारे गिनेंगे रात कर खेल कोई हो विजयश्री प्रेम के हिस्से में लिख जितने धोखेबाज़ हैं हिस्से में उन के मात कर

Atul K Rai0 Likes

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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं

Rahat Indori

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

Ali Zaryoun

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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी

Jaun Elia

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हम भी गाँव में शाम को बैठा करते थे हम को भी हालात ने बाहर भेजा है

Zahid Bashir

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फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था

Adeem Hashmi

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