inqalab aaega raftar se mayus na ho bahut aahista nahin hai jo bahut tez nahin
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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बहुत मुश्किल है कोई यूँँ वतन की जान हो जाए तुम्हें फैला दिया जाए तो हिन्दुस्तान हो जाए
Kumar Vishwas
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हम ने पर्चे आँसुओं से भर दिए और तुम ने इतने कम नंबर दिए ऊंचे नीचे घर थे बस्ती में बहुत जलजले ने सब बराबर कर दिए
Zubair Ali Tabish
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बहुत दिन से तुम्हें देखा नहीं है, ये आँखों के लिए अच्छा नहीं है
Rahat Indori
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मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले
Ali Sardar Jafri
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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ये तेरा गुलिस्ताँ तेरा चमन कब मेरी नवा के क़ाबिल है नग़्मा मिरा अपने दामन में आप अपना गुलिस्ताँ लाता है
Ali Sardar Jafri
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प्यास जहाँ की एक बयाबाँ तेरी सख़ावत शबनम है पी के उठा जो बज़्म से तेरी और भी तिश्ना-काम उठा
Ali Sardar Jafri
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पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है
Ali Sardar Jafri
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